भारतीय राष्ट्रीय पंचांग | Hindu Months Name | Indian Calendar

पंचाग यानि कैलेंडर का मतलब होता है वैसी प्रणाली जिससे दिन, महीने, पर्व एवं त्यौहार को नामांकित किया जाता है। 

पंचाग को खगोलीय तत्वों से जोड़ा जाता है। बारह महीने का एक वर्ष होता है और सात दिन की एक सप्ताह। इस पद्धति का प्रचलन विक्रम संवत से शुरू हुई। कैलेंडर में सप्ताह एवं महीने की गणना सूर्य एवम चन्द्रमा की गति के हिसाब से निर्धारित किया जाता है। आकलन यानि गणना के आधार पर हिन्दू कैलेंडर को तीन स्रोतों पर आकलित किया जाता है -
  • चन्द्र आधारित 
  • नक्षत्र आधारित 
  • सूर्य आधारित 

आकलन करने की ये तीनों पद्धतियाँ भारत वर्ष में भिन्य-भिन्य प्रकार से मानी जाती है।     

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार एक साल में बारह महीने होते है। प्रत्येक महीने में दो पक्ष होते है जिनका चक्र 15-15 दिन निर्धारित होता है -
  • शुक्ल पक्ष 
  • कृष्ण पक्ष  

हिन्दू कैलेंडर या पंचाग के उद्देश्य 

  • त्यौहार, धार्मिक उत्सव एवं ज्योतिष शास्त्र 
  • यज्ञ, हवन, विवाह-विधि 
  • रास्ट्रीय पर्व, अवकाश,  प्रशासनिक काम और दैनिक जीवनचर्चा   


हिन्दू पंचाग के प्रकार 

  1. सौर प्रणाली 
  2. चन्द्र प्रणाली 
  3. सौर-चन्द्र प्रणाली 

सौर प्रणाली 

सौर प्रणाली का पंचाग यानि कैलेंडर अपनी तारीखे को पृथिवी की स्थिति को सूर्य के चारों ओर अपनी परिक्रमा पर गणना करता है। सौर प्रणाली के अनुसार एक वर्ष 365 दिन, 5 घण्टे, 48 मिनट और 46 सेकंड का होता है। इसमें वर्ष और त्योहारों में समानता रहती है। ग्रेगोरियन कैलेंडर इस प्रणाली का उदाहरण है।

चन्द्र प्रणाली 

चंद्र प्रणाली, चंद्र घूर्णन अर्थात चाँद की कला पर आधारित प्रणाली है। चंद्रमास दो पूर्णिमा के बीच का मास होता है - अमावस्या से अमावस्या तक। 29.26 दिन से 29.80 दिन। चंद्र प्रणाली के अनुसार एक वर्ष 354.37 का होता है तथा इस वर्ष को हम चन्द्र वर्ष भी कहते है। चंद्र प्रणाली में हर ढ़ाई साल के बाद एक महीना जोड़ा यानि रिपीट करता है जिसे हम अधिक मास के नाम से जानते है। सबसे पुराना चंद्र प्रणाली पंचाग स्कॉटलैंड के क्रेथीस कैंसल का चंद्र प्रणाली पंचाग है।

चन्द्र-सौर प्रणाली  

सूर्य और चन्द्रमा के एक साथ कार्य करने को चन्द्र-सौर प्रणाली कहा जाता है। इस प्रणाली में वर्ष का निर्धारण सौर्य चक्र द्वारा होता है तथा महीने का निर्धारण चंद्र चक्र द्वारा।

सौर माघ 

सौर्य माघ बारह महीने के होते है तथा इनके माह के नाम का निर्धारण 12 राशियों के नाम पर आधारित है।


चन्द्र माह 

चंद्र माह में एक महीने में या तो अमावस्या होता है या फिर पूर्णिमा। अमावस्या में चाँद के आधे दर्शन होते है तथा पूर्णिमा में पूर्ण चाँद दिखाई पड़ता है। भारत वर्ष में चंद माह की ही प्रचलन है।

महीने का निर्धारण 

एक महीन में दो पक्ष यानि पखवाड़ा होता है जिसकी अवधि लगभग दो सप्ताह की होती होती हैं -

  • शुक्ल पक्ष - आमवस्या से शुरू 
  • कृष्ण पक्ष - पूर्णिमा से शुरू 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार महीने का नाम 


1. चैत्र 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का आरम्भ चैत्र माह से होता हैं। यह माह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मार्च-अप्रैल के मध्य आता है। इस महीने की अवधी 31 या 30 होती हैं। भारतवर्ष के पूर्व में नव वर्ष का आगमन गुड़ी पड़वा के पर्व से मनाया जाता हैं। ठीक इसके 6 दिन बाद उत्तर-पूर्व में छठ पर्व मनाया जाता है।

चैत्र माह की शुरुआत माँ दुर्गा के उपासना से आरम्भ होता है और ठीक नवीं दिन भगवान राम के जन्मदिन रामनवमी मनाई जाती है। चैत्र माह के पूर्णिमा के आखिरी दिन पूरा भारतवर्ष हनुमान जयन्ती मनाता है। इसीलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चैत्र माह सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है।

2. वैशाख  


हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का दूसरा माह वैशाख होता है। यह माह अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अप्रैल-मई के मध्य आता है। इस महीने के अवधी 31 दिन का होता है। वैशाख माह के पहले दिन बंगाल में पोहेला वैशाख पर्व मनाया जाता है। बंगाली कैलेंडर की शुरुआत इस तिथि से ही होती है। वैशाख माह में पूर्णिमा के दिन बुद्ध भगवान का जन्मदिन मनाया जाता है जिसे बुद्ध पूर्णिमा के नाम से जाना जाता है।

3.जयेष्ठ  

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का तीसरा माह जयेष्ठ या जेठ होता है। यह माह अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार मई-जून के मध्य आता है। इस महीने की अवधी 31 दिन का होता हैं। जयेष्ठ माह में अमावस्या के दिन शनि भगवान की जयंती मनाई जाती है - शनिदेव जयन्ती
इस महीने के एक महत्वपूर्ण त्यौहार गंगा दशहरा भी है जिसे पुरे हर्ष-उल्लास से सम्पूर्ण भारतवर्ष में मनाई जाती है।

4. आषाढ़ 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का चौथा माह आषाढ़ होता हैं। इस माह का आगमन अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जून-जुलाई के मध्य आता है। इस माह अवधी 31 दिन का होता हैं। ओड़िसा के पुरी जगह में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा हर वर्ष आषाढ़ में मनाया जाता है।

5. श्रावण 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का पाँचवा माह श्रावण होता है। श्रावण महीना अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार जुलाई-अगस्त के मध्य आता हैं। इस महीने की अवधी 31 दिन का होता हैं। श्रावण माह एक धार्मिक महीना है, इस माह में कई बड़ी धार्मिक पर्व-त्योहार होते है। इस महीने के हर सोमवार को भगवान शिव के शिवलिङ्ग पर जल अर्पण किया जाता है तथा मंगलवार को माँ पार्वती की आराधना होती है। इसी पवित्र माह में भारत वर्ष को अंग्रेजो से करीब दो सौ वर्षों के बाद आजादी मिली थी।

भगवान कृष्ण का जन्मदिन कृष्णा अष्टमी इसी माह में मनाया जाता है। भाई-बहनों के प्यार विश्वाश का महान पर्व  रक्षाबंधन इसी माह के श्रावण पूर्णिमा के दिन मनाया जाता हैं।

6. भाद्रपद  


हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का छठा महीना भाद्रपद या भादों होता हैं। भाद्रपद महीना अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अगस्त-सितम्बर के मध्य आता है। इस महीने की अवधी 31 दिन का होता है। हिन्दू धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस माह में भगवान शिव के छोटे पुत्र भगवान गणेश की जन्मदिवस "गणेश चतुर्थी" मनाया जाता है। ऐसी मान्यता है की भाद्रपद माह के आठवें दिन देवी राधा का जन्मदिवस है।

7. अश्विन 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का सातवाँ महीना अश्विन है। आश्विन महीना अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार सितम्बर-अक्टूबर के मध्य आता है। इस महीने की अवधी 30 दिन की होता हैं। अश्विन महीना पर्व-त्योहारों का महीना माना जाता हैं। नवरात्री यानि दुर्गा पूजा से इस माह की शुरुआत होती है तथा इस महीने का अन्त प्रकाश का पर्व दिवाली के साथ होती है।

8. कार्तिक 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष का आठवा महीना कार्तिक है। कार्तिक महीना अँग्रेजी कैलेंडर के अनुसार अक्टूबर- नवंबर के मध्य आता है। इस महीने की अवधी 30 दिन की होती है। कार्तिक महीने की शुरुआत सूर्य देव के उपासना छठ पर्व के साथ होता है। भैयादूज, गोवर्द्धन पूजन के जैसे मुख्य पर्व भी इस महीने मनाया जाता है।

9. अगहन 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के नवमी महीने को अगहन कहा जाता है। अगहन महीने अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार नवंबर-दिसंबर के मध्य आता है। इस महीने की अवधी 30 दिन की होती है। अगहन में भैरव अष्ठमी तथा कृष्ण पक्ष अष्ठमी मनाया जाता है। एक मान्यता के अनुसार भगवान शिव की धरती पर अवतार हुआ था, इस अवतार को श्री कालभैरव के नाम से जाना जाता है।  

10. पौष  

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार वर्ष के दसवी महीने को पौष कहा जाता हैं। पौष महीना अंग्रेजी कैलेंडर के अनुसार दिसंबर-जनवरी के मध्य में आती है। इस महीने को अवधी 30 दिन की होती है। पौष माह में उत्तरी-पूर्वी भारत में कड़ाके की ठंढ की शुरआत होती है। इस महीने में उत्तरी भारत में कोई शुभ कार्य करने से लोग परहेज करते है।

11. माघ 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार साल की ग्यारहवीं माह को माघ महीना कहा जाता है। माघ महीना मुख्यतः जनवरी-फ़रवरी के मध्य में आती है। इस महीने की अवधी 30 दिन की होती है। माघ माह में उत्तरी-पूर्वी भारत में ठंढ अपने चरम पर होती है। इस माह की शुरुआत पुरे भारत में अलग-अलग पर्व-त्यौहार से होती है। मकर सक्रांति, पोंगल तथा लोहड़ी मनाई जाती है। इस माह में ही विद्या की देवी माँ सरस्वती की उपासना होती है जिसे हम बसन्त पंचमी के नाम से जाना जाता है।  

12. फ़ाल्गुन 

हिन्दू कैलेंडर के अनुसार साल की 12वां यानि अंतिम महीना को फाल्गुन महीना है। फाल्गुन महीना मुख्यतः फ़रवरी-मार्च के मध्य में आती है। इस महीने की अवधी 30 दिन की होती है। फाल्गुन माह में महा शिवरात्रि, होलिका दहन तथा होली जैसे महत्वपूर्ण पर्व मनाये जाते है। 

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