गुलज़ारी लाल नंदा | Gulzarilal Nanda Biography in Hindi

Gulzarilal Nanda in Hindi
गुलज़ारीलाल नंदा 

गुलज़ारीलाल नंदा का एक परिचय  

  • नाम - गुलज़ारीलाल नंदा 
  • जन्म - 04 जुलाई 1898 
  • जन्म स्थान - सियालकोट, पँजाब 
  • पिता का नाम -  बुलाकी राम नंदा 
  • माता का नाम - ईश्वर देवी नंदा 
  • पार्टी - भारतीय रास्ट्रीय कांग्रेस 
  • मृत्यु - 15 जनवरी, 1998 
  • सम्मान - भारत रत्न ( वर्ष 1997 ), पद्म विभूषण   



गुलज़ारीलाल नंदा की प्रारम्भिक जीवन 

कॉंग्रेस के दिग्गज नेता और स्वतन्त्रा सेनानी गुलज़ारीलाल नंदा का जन्म 04 जुलाई, 1898 को सियालकोट के पँजाब में हुई थी जो अब पश्चिम पाकिस्तान का हिस्सा है। इनके पिताजी का नाम बुलाकी राम नंदा तथा माता का नाम ईश्वर देवी नंदा था। गुलज़ारीलाल नंदा की प्रारंभिक शिक्षा सियाल कोट पंजाब में ही हुई थी। गुलज़ारीलाल नंदा ने अपनी कॉलेज की पढ़ाई लाहौर के फोरमैन क्रिचियन कॉलेज में हुई। 

गुलज़ारीलाल नंदा बहुत प्रतिभाशाली व्यक्ति थे। इलाहाबाद विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में मास्टर डिग्री हासिल किया। अपनी पढाई के दौरान गुलज़ारीलाल नंदा ने मजदूरों की समस्याओं पर शोध किया था जिसके कारण उन्हें कॉलेज में अर्थशास्त्र के प्रोफेसर की नौकरी मिल गई। बाद में गुलजारी लाल नंदा ने कानून की भी पढ़ाई पूरी की। गुलज़ारीलाल नंदा की शादी वर्ष 1916 में लक्ष्मी देवी से हुई जिनसे इन्हें दो पुत्रों तथा एक पुत्री की प्राप्ति हुई। 


गुलज़ारीलाल नंदा की राजनीतिक जीवन   

गुलज़ारीलाल नंदा महात्मा गाँधी से काफी प्रभावित थे। अपने देश के प्रति नंदाजी का प्यार काफी था। महात्मा गाँधी ने जब वर्ष 1921 में असहयोग आल्दोलन का अवाहन किया तो गुलज़ारीलाल नंदा ने इस आल्दोलन में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। वर्ष 1922 में अहमदाबाद की टेक्सटाइल्स इंडस्ट्रीज में मजदूरों के संगठन में सचिव पद पर नियुक्त हुए थे।

गुलजारीलाल नंदा स्वतन्त्रा संग्राम में अपनी योगदान देते रहे जिसके कारण उन्हें वर्ष 1931 में सत्याग्रह आल्दोलन में जेल जाना पड़ा। गुलज़ारीलाल नंदा को वर्ष 1937 -39 के लिए मुम्बई विधानसभा से विधायक चुना गया। वर्ष 1942 में अगस्त क्रांति के दौरान गुलज़ारीलाल नंदा को गिरफ्तार कर लगभग दो वर्षो तक जेल में रखा गया। 

आजादी के पश्चात गुलज़ारीलाल नंदा जी को पुनः विधायक चुना गया। इस दौरान इन्होने इंडियन नेशनल ट्रैड यूनियन कांग्रेस की स्थापना की।  बॉम्बे सरकार में नंदा जी ने श्रम मंत्री के तौर पर अहम् भूमिका निभाई थी। मजदूरों और उद्योगपतियों के बीच सामंजस्य बनाने के लिए श्रमिक विवाद विधेयक को सफलतापूर्वक लागु करवाया। गुलज़ारीलाल नंदा को बॉम्बे हाउसिंग बोर्ड का अध्यक्ष भी बनाया गया था।   

आजादी के बाद गुलज़ारीलाल नंदा ने भारत का मजदूरों के मामले में दुनिया भर में प्रतिनिधित्व किया। मजदूरों के रोजमर्रा के जीवन में होने वाले समस्या से अवगत कराया जिसमे स्विट्जरलैंड में अंतरास्ट्रीय मजदूर सम्मलेन में  दिया गया उनका शानदार भाषण था।

पंडित जवाहरलाल नेहरू के काफी करीब गुलज़ारीलाल नंदा माने जाते थे इसलिए नेहरूजी ने अपने सबसे महत्वकांक्षी योजना के लिए नंदाजी पर भरोसा किया। वर्ष 1950 में गुलज़ारीलाल नंदा को योजना आयोग का उपाध्यक्ष चुना गया। नंदा जी ने अपने मजदूरों की समस्या और आम भारतीयों की जरूरतों का पूरा ख्याल रखते हुए योजना आयोग का पूरा खाका खींचा। 

वर्ष 1951 में गुलज़ारीलाल नंदा को नेहरू जी ने और जिम्मेदारी सौपतें हुए उन्हें योजना मन्त्री बना दिया। पहले लोक सभा चुनाव में नंदा जी ने वर्ष 1952 में बॉम्बे लोक सभा से चुनाव जीत कर संसद पहुंचे। गुलज़ारीलाल नंदा को और बड़ी जिम्मेदारी सौपी गई, उन्हें इस बार योजना आयोग के अलावा ऊर्जा और सिंचाई विभाग की भी जिम्मेदारी सौंपी गई। 

तीसरे लोक सभा चुनाव के बाद श्रम और रोजगार मन्त्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई। इस वक़्त देश की हालात सबसे बुरे दौर से गुजर रही थी। चीन से युद्ध हारने के बाद भारत की स्थिति आंतरिक और बाहरी दोनों रूप से खस्ता थी। नेहरू जी ने गुलजारीलाल नंदा पर और भरोसा जताते हुए उन्हें एक और बड़ी जिम्मेदारी सौपी उन्हें देश का गृह मन्त्री बनाया गया।  


कार्यवाहक प्रधानमन्त्री की जिम्मेदारी   

वर्ष 1964 में पंडित जवाहरलाल नेहरू की मृत्यु के बाद गुलजारीलाल नंदा को पहली बार देश का कार्यवाहक प्रधानमन्त्री बनाया गया। जिस पद की जिम्मेदारी इन्होने बखूबी निभाई। वर्ष 1966 में जब लालबहादुर शास्त्री की अकास्मिक मृत्यु के बाद देश शोक में डूबा हुआ था तब उस समय गुलज़ारीलाल नंदा ने दोबारा देश की कार्यवाहक प्रधानमन्त्री का पद बखूबी सम्भाला। 

गुलज़ारीलाल नंदा का सम्मान एवं निधन 

वर्ष 1991 में गुलज़ारीलाल नंदा को भारत देश का दूसरा सर्वोच्य सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया। कुछ वर्षो बाद वर्ष 1997 में गुलज़ारीलाल नंदा को उनके देश के लिए दिए गए अभूतपूर्व योगदान के लिए भारत देश का सर्वोच्य सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। 

अपने जीवन के सौ वर्ष पूर्ण होने के कुछ महीनों पहले गुलज़ारीलाल नंदा का 15 जनवरी 1998 में निधन हो गया। 

देश के प्रति अभूतपूर्व योगदान के लिए गुलज़ारीलाल नंदा को सदैव याद रखा जायेगा। 
!! जय हिन्द !!