वीर अलगू मुथु कोणे | Maveeran Alagumuthu Kone Biography in Hindi

Maveeran Alagumuthu Kone Biography in Hindi
वीर अलगूमुथु  कोण 

भारत के प्रथम तमिल कोणार योद्धा जिसने ब्रिटिश हुकूमत का विरोध किया उनका नाम वीर अलगूमुथु  कोण यादव था, जिन्हें अलागुमुथु कोणार के नाम से भी जाना जाता है। मुथु कोण का जन्म 11 जुलाई 1710 में तमिल नाडु के तिरुनेवेली जिले के क़त्तालानकुलम गाँव में हुआ था। दक्षिण भारत में ब्रिटिश हुकूमत बहुत तेजी से अपनी ताकत बढ़ा रही थी।

वर्ष 1751, मदुरई राज्य भी अंग्रेजो की गुलाम हो चुके थे। अरकोट के नवाब ने अंग्रेजों के अधीनता स्वीकार कर ली।  एट्टयपुरम राज्य के राजा एट्टयपा नैकर के यहाँ मुथु कोण एक सेवादार थे। कोण एक प्रतिभासाली योद्धा थे इनकी चतुराई और बुद्धिमता की प्रशंसा चारों तरफ होती थी। इनके बढ़ते नाम से जलने वालो की भी कमी नहीं थी। कुछ दरबारिओं ने पॉलीगर राजा के कान कोण के विरुद्ध भर दिए। उसके बाद मुथु कोण राजा के नजरो में खटकने लगे। 

अलगू मुथु कोणे को ये अहसास हो चूका था की राजा उसके ईमानदारी पर संदेह करने लगे है तब इन्होने फैसला किया की वो अब यहाँ काम नहीं करेंगे। ईस्ट इंडिया कंपनी ने अपने मिलिटरी का खर्च एट्टयपुरम राज्य से मांग की, जिसे नहीं देने पर ईस्ट इंडिया कम्पनी अब सीधे लोगो से टैक्स वसूलने लगी. अलगू मुथु कोण ने इस टैक्स का विरोध किया और कंपनी को टैक्स देने से इंकार कर दिया. तब, बूथलापुरम एट्टैया जो राजा का रिश्तेदार थे  उसने ब्रिटिश कंपनी को लालच दिया की अगर उसे एट्टयपुरम का राजा बना दिया जाता है तो वो उसकी मदद करेगा; अंग्रेज मान गए।

मदुरई के सेवादार खान साहिब और बूथलापुरम ने एट्टयपुरम पर चढ़ाई कर दी।  तब कोण ने राजा एटापनायकर को वहाँ से सही सलामत निकालकर पेरुनाजहि ले गए। बूथलापुरम एट्टैया राजा बनते ही भोग विलाश में डूब गया और अंग्रेजो से किये गए वादों को भूल गया। तब अंग्रेजों ने एटापनायकर के भाई कुरुमलेथुरई को वहाँ का राजा बना दिया। इधर मुथु कोण एटापुरम पर चढ़ाई के लिए सेना तैयार करने में लग  गए।  लोगो को एहसास दिलाने में मुथु सफल हो गए की अंग्रेज उनके जीवन, जमीं और सम्मान की उनसे छीन रहे, इसके लिए उन्हें लड़ना पड़ेगा।  कुछ ही दिनों में बहुत से लोगो ने सेना में शामिल हो कर परीक्षण लेना शुरू कर दिया।

मुथु कोण के नेतृत्व में एट्टप्पार पर सेना ने चढ़ाई कर दी। अंग्रेजो के सेना के सामने कोण की सेना की संख्या बहुत कम थी लेकिन कोण की सेना बहुत बहादुरी से लड़ी, मुथु कोण की दाहिने हाथ अंग्रेजो के तोप को नष्ट करने के प्रयास में उड़ गया।

वीर अलगु मुथु कोणे एक बहादुर योद्धा थे। सही मायनों में कोण पहले स्वंतत्रा सेनानी थे। जिन्होंने अपने मातृभूमि के लिए अंग्रेजो के खिलाफ युद्ध किया, लोगों को स्वराज्य के लिए जागरूक किया।