राज कपूर | Raj Kapoor Biography in Hindi

Raj Kapoor in Hindi
राज कपूर 

राज कपूर का एक परिचय 

  • नाम - रणबीर राज कपूर
  • जन्म - 14 दिसंबर, 1924 
  • जन्म स्थान - पेशावर, पाकिस्तान 
  • पिता का नाम - पृथिवी कपूर
  • माता का नाम - रामसरणी कपूर 
  • पत्नी का नाम - कृष्णा कपूर 
  • बच्चों का नाम - 1. रणधीर कपूर  2. ऋतु कपूर नड्डा  3. ऋषि कपूर  4. राजीव कपूर  5. रीमा जैन 
  • सम्मान - पद्म भूषण (1971)  दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड (1987)
  • व्यवसाय - अभिनेता, निर्माता, और निर्देशक 
  • उपनाम - The Greatest Show Man of Indian Cinema, The Showman
  • मृत्यु - 02 जून 1988 (63 वर्ष ) 

   
इन्हें  माना गया भारत का सबसे बड़ा शोमैन नाम " रणबीर राज कपूर ", जिन्हें हम प्यार से सिर्फ राज कपूर के नाम से जानते  है। राज कपूर का जन्म 14 दिसंबर 1924 को पेशवार में हुआ जो अब पाकिस्तान का हिस्सा है। राज कपूर के पिताजी महान अभिनेता पृथ्वी राज कपूर थे तथा उनके माताजी का नाम रामसरणी कपूर था। राज कपूर साहब अपने छः भाई बहनों में सबसे बड़े थे। इनके दो भाई बचपन में ही किसी बीमारी से चल बसें। इनके दोनों भाई भी बॉलीवुड के महान मशहूर अभिनेता हुए शशि कपूर और सम्मी कपूर। इनकी एक बहन भी थी जिनका नाम था उर्मिला सियाल। 

सन 1930 में पृथ्वीराज कपूर काम के सिलसिले में पेशावर से कलकत्ता चले आये। राजकपूर साहब की शुरूआती शिक्षा-दीक्षा कई शहरों में हुई जिनमे  कलकत्ता, देहरादून तथा मुम्बई है। पृथ्वी राज कपूर साहब ने अपने बच्चों के लालन पालन में काफी सावधानियाँ बरती उन्होंने कभी भी बच्चों को आराम तलबी को प्रेरित नहीं किया।

राज कपूर साहब का एक बचपन की कहानी बहुत मशहूर है जब वो छोटे थे तो कलकत्ता में काफी बारिष हो रही थी। राज कपूर की माता जी ने पृथ्वी राज कपूर से कहाँ  "आज बहुत बारिष हो रही क्यों न राज कार से स्कूल चला जाए ", तब पृथ्वी कपूर साहब ने कहा की  " वैसे तो बारिष पुरे शहर के लिए हो रही और जिन्हें काम पर जाना है वो ट्राम लेकर जा ही रहें ", ये बातें राज कपूर साहब दूसरे रूम से सुन रहे थे वो छाता लेकर स्कूल के लिए निकल गए , यह देख उनकी माँ ने राज कपूर को रोकना चाहा तब पृथ्वी राज कपूर ने कहा उसे जाने दो इसके थोड़े से खुद्दारी को ललकारा तो ये खुद निकल गया एक दिन ये लड़का ऐसी-ऐसी गाड़ियों में घूमेगा जिनके बारे में हमलोगों ने सोचा भी नहीं होगा। 

राज कपूर का कैरियर  


मात्र 11 साल की उम्र में सन 1935 में उन्हें पहली बार फिल्म इंकबाल में बाल कलाकार के रूप में काम करने का मौका मिला। इसके बाद राज कपूर साहब डारेक्टर केदार शर्मा के साथ क्लैपर बॉय का काम करने लगे। पृथ्वी राज कपूर का मानना था किसी भी बड़े काम को करने के लिए उसे छोटे काम से ही शुरुआत करनी चाहिए। राज कपूर को पढ़ाई में मन नहीं लगता था इसपर पृथ्वी कपूर का कहना था राज अभिनय के दुनिया में नाम कमाने के लिए जन्म लिया एक दिन दुनिया मुझे राज के पिता के नाम से जानेगी। 

Raj Kapoor in childhood
राज कपूर की बचपन की फोटो 

डारेक्टर केदार शर्मा ने राज कपूर को पहली सोलो फिल्म में काम करने का मौका दिया। सन 1947 में बनी नीलकमल में राज कपूर को मुख्य अभिनेता के तौर पर लिया गया। इस फिल्म ने बॉलीवुड इंडस्ट्रीज को एक ऐसी सुपरहिट जोड़ी दिया जिसने भारतीय फिल्मों की किस्मत ही बदल दी। ये जोड़ी थी - राज कपूर और मधुबाला की। 1947-48 में इस जोड़ी ने कई सुपरहिट फिल्म दी - नीलकमल, चित्तौर विजय, दिल की रानी तथा अमर प्रेम। 

1948 में राज कपूर ने अभिनय के साथ-साथ निर्माता-निर्देशन में भी कदम रखा और उनकी पहली फिल्म थी " आग ",  यह फिल्म पारम्परिक फिल्मों से हट कर थी जिसके कारण इस फिल्म को वो सफलता न मिली जिसकी उम्मीद राज कपूर को थी। एक डिस्ट्रीब्यूटर ने राज साहब पर तंज कसते हुए कहा था जब सब कुछ आप ही कर रहे थे तो एक थियेटर भी क्यों नहीं बनवा लेते कम से कम दूसरे के थियेटर में आग तो न लगाते।

राज कपूर पर किया गया तंज उनके लिए प्रेणना का काम किया। राज कपूर ने फैसला किया की वो थियेटर अपना जरूर बनाएंगे। कहा जाता है जब उन्होंने थियेटर बनाने का फैसला किया तो उनकी पत्नी कृष्णा कपूर ने कहा की पहले अपने लिए एक घर तो बनवा लो तो राज कपूर ने कहा जिनके घर होते है उनके थियेटर नहीं होते लेकिन जिनके पास थियेटर होते है उनके पास घर जरूर होते है। 

राज कपूर - असफलता से सफलता के शिखर की ओर 

आग की असफलता से राज कपूर साब विचलित नहीं हुए बल्कि उन्हें एक नई राह दिखाई दी। एक नए जोश के साथ 1949 में राज कपूर बरसात लेकर आए। उस समय के क्रिटिक्स का कहना था - आग में जो कुछ भी जलने से बच गया वो बरसात में बह जाएगी। बरसात एक प्रयोग थी क्योंकि पूरी फिल्म में नए लोगो को अपना हुनर दिखने का मौका दिया गया था। फ़िल्मी की नायिका से लेकर गायक तक लगभग सभी नए थे। 

फिल्म के लेखक थे - रामानंद सागर, गीतगार थे - हसरत जयपुरी और शैलेन्द्र, संगीतकार थे - शंकर-जयकिशन और अभिनेत्री थी निम्मी। अभिनेता, निर्देशक और निर्माता का काम खुद राज कपूर ने संभाला था। जैसा की आलोचकों का अनुमान था फिल्म ने उनके ठीक विपरीत कारोबार की। बरसात फिल्म बॉक्स ऑफिस पर सुनामी की तरह आई। सारे आलोचना और डर को अपने साथ बहा ले गई। बरसात से जुड़े जितने भी सदस्य थे उन्होंने रातों-रात शोहरत का मुकाम हासिल कर लिया। लता मंगेसकर और मुकेश की जोड़ी ने गाये हुए गानों ने सफलता के सारे सीमाएं लाँघ गई।   

बरसात की सफलता के अगले साल राज कपूर की छः फिल्में बतौर अभिनेता के रूप में आई और सबने बॉक्स ऑफिस पर अच्छी कमाई की। इसके बाद राज कपूर साहब ने पीछे मुड़ कर नहीं देखा। 

सन 1951 में राज कपूर को वो फिल्म आई जिसने उन्हें राष्ट्रीय ही नहीं अंतर्राष्ट्रीय पहचान दी। वो फिल्म थी - आवारा। ये फ़िल्म राज कपूर की ही नहीं भारतीय फिल्म इतिहास के लिए मील का पत्थर का साबित हुआ। आवारा ने भारतीय फिल्मों की अलग पहचान दी। चीन, मिस्र और सोवियत संघ में राज कपूर काफी लोकप्रिय हो गए। यह फिल्म ने राज कपूर को अभिनेता से महान अभिनेता बना दिया। इस फिल्म ने राज कपूर को निर्माता-निर्देशक के रूप में अलग पहचान दी।

आवारा फिल्म में राज कपूर के अलावा पृथ्वी कपूर और शशि कपूर ने भी काम किया। फिल्म पंडितो का कहना था की "आवारा "  फिल्म ने राज कपूर को अंतर्राष्ट्रीय मंच पर जवाहर लाल नेहरू से ज्यादा लोकप्रिय बना दिया था। चीन के बड़े नेता माओ त्से तुंग ने एक सार्वजनिक मंच पर कहा था की "आवारा " उनकी सबसे पसंदीदा फिल्म है। आज भी विदेशों में सड़को पर " आवारा हूँ " गाने गाते लोग मिल जाते है।

इस फिल्म ने भारतीय फिल्म इंडस्ट्रीज को एक नई सुपरहिट जोड़ी दी - राज कपूर और नर्गिस की जोड़ी। सन 1951 से 1956 के बीच राज कपूर की जितने भी फिल्म आई उसमे अभिनेत्री का किरदार सिर्फ नर्गिस ने ही निभाई। राज कपूर ने अपने लम्बी फिल्म कैरियर में काफी उतार चढ़ाव देखा। उन्होंने अभिनेता, निर्माता और निर्देशक के रूप में एक नई ऊंचाई प्रदान की। सन 1970 में राज कपूर ने बहुत बड़ी महत्वकांक्षा के साथ 'मेरा नाम जोकर' बनाई लेकिन ये फिल्म उनके उम्मीद पर खड़ी न उतरी। उसके बाद राज कपूर ने मुख्य अभिनेता के रूप में सन्यास ले लिया। 

मेरा नाम जोकर की असफ़लता के बाद राज कपूर ने फिल्मो को अलग ढंग से सोचना शुरू किया। उन्होंने फैसला किया  की एक नई तरह की फिल्म लोगों के लिए लाएंगे। उन्होंने अपने टीम को कहा की आप नई तरह की कहानी देखे और नई अभिनेत्री को ढूँढ़े। इसके बाद बॉबी फिल्म के लिए एक नई जोड़ी को लोगो के सामने लाये वो जोड़ी थी - ऋषि कपूर और डिम्पल कपाड़िया। इस जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया। इसके बाद राज कपूर ने सत्यम शिवम् सुन्दरम और राम तेरी गंगा मैली जैसे कई फिल्मों का निर्देशन किया जिसमें कला और सौन्दर्य का बखूबी प्रदर्शन किया। 
         

राज कपूर को सम्मान 

राज कपूर के चाहने वाले ने तो कई नाम दिया शोमैन, चार्ली चैंपियन ऑफ़ इंडिया और भी कई। इसके साथ ही राज कपूर को भारत सरकार ने सन्न 1971 में पद्म भूषण सम्मान से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही 1987 में उन्हें  दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उनके कई फिल्मों को समय-समय पर फिल्मफेयर पुरस्कार से सम्मानित किया -

1960 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - अनाड़ी
1962 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ अभिनेता पुरस्कार - जिस देश में गंगा बहती है
1965 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार - संगम
1972 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार - मेरा नाम जोकर
1983 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक पुरस्कार - प्रेम रोग
1983 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ सम्पादक पुरस्कार - प्रेम रोग
1986 - फ़िल्मफ़ेयर सर्वश्रेष्ठ निर्देशक और सम्पादक पुरस्कार - राम तेरी गंगा मैली 


Raj Kapoor Biography in Hindi
Filmfare के मुख्य पृष्ठ पर राज कपूर 

राज कपूर की मृत्यु 

राज कपूर को 1987 में दादा साहब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषना की गई। जब सम्मान को लेने के लिए राज कपूर 1988 में दिल्ली आए थे तो उनकी तबीयत काफी खराब हो गई जिसके कारण उन्हें दिल्ली एम्स में भर्ती कराया गया। कुछ दिनों बाद 02 जून 1988 को इनकी मृत्यु हो गई। राज कपूर साब जैसा सितारा न भारतीय फिल्म इतिहास में न आया और न आएगा।

राज कपूर की फ़िल्मोग्राफ़ी  


वर्ष
फ़िल्म
वर्ष
फ़िल्म
1935
इन्कलाब (बाल कलाकार के रूप में पहली फ़िल्म)
1958
परवरिश
1943
गौरी
1958
फिर सुबह होगी
1943
हमारी बात
1959
अनाड़ी
1946
वाल्मीकि
1959
कन्हैया
1947
नीलकमल (नायक-रूप में प्रथम फ़िल्म)
1959
दो उस्ताद
1947
दिल की रानी
1959
मैं नशे में हूँ
1947
चित्तौड़ विजय
1959
चार दिल चार राहें
1947
जेल यात्रा
1960
जिस देश में गंगा बहती है
1948
अमर प्रेम
1960
छलिया
1948
गोपीनाथ
1960
श्रीमान सत्यवादी
1948
आग (नायक+निर्माता-निर्देशक-रूप में प्रथम फ़िल्म)
1961
नज़राना
1949
परिवर्तन
1962
आशिक
1949
बरसात (स्वनिर्मित प्रथम सुपरहिट फ़िल्म)
1963
दिल ही तो है
1949
सुनहरे दिन
1963
एक दिल सौ अफ़साने
1949
अंदाज़
1964
संगम
1950
सरगम
1964
दूल्हा दुल्हन
1950
भँवरा
1966
तीसरी कसम
1950
बावरे नैन
1967
अराउन्ड वर्ल्ड
1950
प्यार
1967
दीवाना
1950
दास्तान
1968
सपनों का सौदागर
1950
जान पहचान
1970
मेरा नाम जोकर (नायक-रूप में अंतिम फ़िल्म )
1951
आवारा
1971
कल आज और कल
1952
अनहोनी
1973
मेरा दोस्त मेरा धर्म
1952
अंबर
1975
धरम करम
1952
आशियाना
1975
दो जासूस
1952
बेवफ़ा
1976
ख़ान दोस्त
1953
धुन
1977
चाँदी सोना
1953
आह
1978
सत्यम शिवम सुन्दरम
1953
पापी
1978
नौकरी
1954
बूट पॉलिश
1980
अब्दुल्ला
1955
श्री ४२०
1981
नसीब
1956
जागते रहो
1982
वकील बाबू
1956
चोरी चोरी
1982
गोपीचन्द जासूस
1957
शारदा