नरेन्द्र मोदी | NARENDRA MODI BIOGRAPHY IN HINDI

NARENDRA MODI BIOGRAPHY IN HINDI
नरेन्द्र मोदी 

नरेंद्र मोदी का एक परिचय 

  • नाम - नरेंद्र दामोदरदास मोदी 
  • जन्म - 17 सितम्बर 1950 
  • जन्म स्थान - वाडनगर, गुजरात 
  • पिता का नाम - दामोदरदास मूलचंद मोदी 
  • माता का नाम - हीराबेन मोदी  
  • पत्नी का नाम - जसोदाबेन चिमनलाल मोदी 
  • राजनीतिक दल - भारतीय जनता पार्टी 
  • चुनाव क्षेत्र - वाराणसी 
  • पद - प्रधानमंत्री
  • कार्यकाल - 16 मई 2014 - अभी तक 
  • उपाधी - विकास पुरुष 


वो जो सामने मुश्किलों का अंबार हैं, वही तो मेरे हौसलों की मीनार हैं - नरेंद्र मोदी 

आज़ादी के बाद पहली बार किसी ग़ैर-कॉंग्रेसी पार्टी ने अपने दम पर पूर्ण बहुमत के साथ केन्द्र में सरकार बनाई, उस पार्टी के सिरोमणि, स्टार प्रचारक, प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र दामोदर दास मोदी का जन्म 17 सितम्बर 1950 को वडनगर गाँव के महेसाना जिला के गुजरात राज्य में हुआ था। नरेंद्र मोदी के पिताजी का नाम दामोदर दास मूलचन्द मोदी  तथा माँ का नाम हीराबेन मोदी था।

नरेन्द्र मोदी अपने छः भाई-बहनों में तीसरे नंबर थे। नरेन्द्र मोदी एक गरीब परिवार से थे जिसके कारण बचपन से ही मोदी काम करने लगे थे। नरेन्द्र मोदी की प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा वडनगर में ही हुई थी। बचपन में नरेंद्र मोदी ने अपने बड़े भाई के साथ चाय की दुकान पर भी काम की। इसलिए इनपर विपक्षी पार्टीयो ने तंज कसते बोलते है चायवाला , जिसे नरेँद्र मोदी ने अपने चुनावी कम्पैन में खूब इस्तेमाल किया।

नरेंद्र मोदी ने भारत-पाकिस्तान द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नजदीकी रेलवे स्टेशन पर युद्ध के लिए जा रहे सैनिकों को मुफ्त चाय पिलाई। युवावस्था में ही भी नरेन्द्र मोदी छात्र संघठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (RSS) में शामिल हो गए थे। इसके बाद नरेन्द्र मोदी ने कई अल्दोलन में भाग लिया।

नरेन्द्र मोदी की शादी बाल-अवस्था में ही हो गई थी। जसोदाबेन चमनलाल से उनकी शादी 17 वर्ष अवस्था में हुई थी। लेकिन कभी भी दोनों एक साथ नहीं रहे, कुछ वर्षो बाद ही नरेन्द्र मोदी ने घर त्याग दी जिसके कारण उनकी व्यवाहिक जीवन लगभग समाप्त हो गया। 

नरेन्द्र मोदी की राजनीतिक में सक्रियता  

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नरेन्द्र मोदी सभा को सम्बोधित करते हुए 

नरेन्द्र मोदी प्रारंभिक शिक्षा के दौरान ही वो RSS की शाखा में जाने लगे। नियमीत रूप से वो मोदी आरएसएस संगठन से जुड़ गए। वो प्रचारक के रूप में गाँव-गाँव, घर-घर जा कर आरएसएस के सोच का प्रचार करने लगे। कुछ ही दिनों बाद भारतीय जनता पार्टी के सक्रीय राजनीतिक से जुड़ गए।

बीजेपी के प्रचार में ये देश के एक कोने से दूसरे कोने जाने लगे। इनके मेहनत और लगन को देखते हुए इन्हें पार्टी में प्रोमोट किया जाने लगा। गुजरात में बीजेपी के बड़े नेता शंकर सिंह बाघेला का जनाधार बढ़ाने के लिए प्लानिंग बनाकर बीजेपी संगठन को गुजरात में मजबूत किया। 

1990 में पार्टी के शीर्षनेता दिल्ली में ज़्यादा व्यस्त रहने लगे थे और नरेन्द्र मोदी की रणनीतिक समझ और पकड़ को देखते हुए उन्हें पार्टी की गुजरात के सर्वोच्च पद की जिम्मेदारी सौंप दी गई। अपने रानीति और परिश्रम के बदौलत बीजेपी ने 1995 के विधान सभा चुनाव में दो तिहाई सीट जीत कर बहुमत की सरकार बनाई। 

1992 के बाबरी मस्जिद घटना के बाद देश की राजनीती की हवा बदलने लगी थी। राम मन्दिर के लिए सहमती बनाने और हिन्दू पार्टी के रूप में स्थापित करने के लिए पार्टी के शीर्ष नेता लाल कृष्ण आडवानी ने पुरे देश में रथ यात्रा निकालने की योजना बनाई। इस रणनीति को सफल बनाने की जिम्मेदारी नरेन्द्र मोदी को मिली। धीरे-धीरे मोदी का कद पार्टी में बढ़ते जा रहा था।

शंकर सिंह बघेला के त्यागपत्र देने के बाद गुजरात के मुख्यमंत्री के पद के होड़ में नरेंद्र मोदी का नाम भी बहुत उछला लेकिन अनुभव की कमी के कारण शीर्ष नेताओं ने नरेंद्र मोदी के दावेदारी को नजरअंदाज कर दिया गया लेकिन मोदी के पार्टी के अन्दर बढ़ते कद को नजरअंदाज नहीं कर सके नरेन्द्र मोदी को उप-मुख्यमंत्री के पद ऑफर किया गया।

लाल कृष्ण आडवाणी और अटल बिहारी बाजपाई जैसे शीर्ष नेताओं के सामने नरेन्द्र मोदी ने इस ऑफर को ठुकरा दिया और कहाँ की देना है तो गुजरात की पूर्ण जिम्मेदारी दीजिये वरना मैं पार्टी के केंद्रीय संगठन में ही खुश हूँ। कुछ ही दिनों बाद खराब स्वास्थ के कारण केशुभाई पटेल ने मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया और उनकी जगह 2001 में नरेन्द्र मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया।    


नरेन्द्र मोदी का मुख्यमंत्री का कार्यकाल 

नरेन्द्र मोदी की मुख्यमंत्री पद की ताज़पोशी 07 अक्टूबर 2001 को हुआ। नरेन्द्र मोदी जितने अपने सादगी के लिए जाने जाते थे उतने ही अपने काम के लिए सख़्त थे। जनभावना से जुड़े रहने के कारण नरेंद्र मोदी को लोगों से जुड़ी समस्या से भलीभाँति अवगत थे। पद सम्भालते हुए ही उन्होंने करवाई करनी शुरू कर दी। लोगों की मुख्य समस्या बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ पर ध्यान दिया।

गुजरात में लोगों की सबसे बड़ी समस्या थी - पानी की समस्या। गुजरात के अधिकांशत भाग पहाड़ी या दूर दराज थे जिन्हें बिजली और पानी पहुँचाना काफी मुश्किल थी। सरोवर नदी पर भारत का दूसरा सबसे बड़ा बाँध बनाकर गुजरातो के गाँव-गाँव तक पानी पहुँचाया।

सुजलाम सुफलाम योजना के तहत पानी पहुँचना तथा बर्बादी रोकने के लिए सफल योजना बनाई। ज्योतिग्राम योजना के तहत प्रत्येक गाँव में बिजली पहुंचे। मातृ-वन्दना, चिरंजीवी योजना तथा बेटी बचाओ योजना के तहत नारी शक्ति को बल देने का काम किया। कन्या कलावणी योजना तथा बालभोग योजना के तहत निर्धन बच्चों को पढ़ाने के लिए प्रेरित किया। 
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नरेन्द्र मोदी योजना पर बोलते हुए 
गुजरात के आदिवासी व वनवासी इलाकों के विकास के लिए 10 सूत्री कार्यक्रम चलाया - 1. आवास 2. स्वास्थ 3. सिंचाई 4. समग्र विद्युतीकरण 5. पाँच लाख परिवार को रोजगार से जोड़ना 6. स्वच्छ पेय जल 7. आर्थिक विकास 8. उच्चतर शिक्षा की गुणवत्ता 9. शहरी विकास 10. बेहतर सड़क मार्ग। इस दस सूत्री के कार्यक्रम के कारण गुजरात में काफी उन्नति आई। इसके कारण गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा पुरे देश में होने लगी। 

गुजरात समुद्र के किनारे होने के कारण यहाँ व्यापार विदेशों में करना बहुत आसान था। गुजराती जन्म से ही व्यापरी होते है लेकिन वहाँ के अफसरबाज़ी के कारण व्यापार करने में काफी मुस्किले हो रही थी तो नरेंद्र मोदी ने आगे बढ़ कर सरकार और लोगों के बीच फैसले कम करने की कोशिश की। डिजिटलिज़शन का बढ़ावा दिया।

अर्श से फ़र्श तक का सफ़र   


26 जनवरी 2001 गुजरात के लिए मनहूस दिन था जिसे भूकम्प के झटकों ने बर्बाद कर दिया। हजारों लोगों ने अपना जान गवां दिया, हजारों करोड़ो की सम्पति का नुकसान हुआ। इस जानलेवा भूकंप ने गुजरात की शक्ल ही बदल दी। ऐसा लगता था की अब इसे पहले जैसा बना पाना मुश्किल ही नहीं नामुनकिन है लेकिन नरेंद्र मोदी ने अपनी राजनीतिक कुशलता और समझ का परिचय देते हुए गुजरात के विकास कार्यों में लग गए।

गुजरात को पहले से ज्यादा सम्पन बनाया। लेकिन कई इलाको में नरेंद्र मोदी की सरकार पर पक्षपात  के भी आरोप लगे। राहत सामग्री और राहत अनुदान देने क लिए सरकार पर सिर्फ आरोप लगे लेकिन कोई पुख्ता सबूत न मिल पाया।      

2002 में गुजरात को वो दाग लगा की जिसे धो पाना शायद ही मुमकिन हो। 27 फ़रवरी 2002 को अयोध्या से लौट रहे भक्तों से भरी ट्रैन जो गोधरा स्टेशन पर खड़ी थी उसपर कुछ उपद्रविओ ने आग लगा दी। जिसमे 59 बेक़सूर कारसेवक जिन्दा जल गए। कार सेवकों की घृणित हत्या के कारण पुरे गुजरात में दंगा फ़ैल गए।  सरकारी आकड़ो के अनुसार लगभग 1200 लोग उस दंगो में मारे गए। लेकिन एक अनुमान के अनुसार लगभग 5000 लोगो की जघन्ह हत्या इस दंगो में हुई।

नरेंद्र मोदी सरकार पर ये आरोप लगे की उन्होंने दंगो पर नियंत्रण करने में जान बूझकर कर देरी की। हालात बेकाबू हो जाने के बावजूद केंद्र से मदद माँगने और सुचना देने में देरी की। इस दंगे को नियंत्रण न करने के कारण पार्टी के शीर्ष नेता अटल बिहारी वाजपई ने उन्हें राजधर्म अपनाने की नसीहत दी थी। 

दंगों के कुछ ही साल बाद केंद्र की सत्ता विपक्षी पार्टी कांग्रेस यानि UPA के पास चली गई। उन्होंने कई जाँच कमेटी दंगो पर बैठाई लेकिन एक भी कमिटी ने नरेन्द्र मोदी के सीधे तौर पर कोई हाथ होने या फैसलों की देरी में कोई भूमिका होने को सिद्ध न कर पाया। और भारत के सर्वोच्च न्यायलय ने भी उन्हें बाइज्जत बरी कर दिया। 


नरेन्द्र मोदी का बढ़ता कद 

2009 के लोक सभा इलेक्शन में NDA की बुरी तरह से हार का सामना करना पड़ा। दबे स्वर में ही नरेंद्र मोदी को अगले चुनाव में NDA का चेहरा बनाने की चर्चा होने लगी। लेकिन शीर्ष नेता इससे बिलकुल इत्तेफाक नहीं रखते थे, उन्हें डर था की NDA में कही फुट न पर जाये। हिन्दुत्व नेता के तौर पर नरेन्द्र मोदी पुरे देश में प्रसिद्ध हो रहे थे।

2012 में गुजरात के विधान सभा चुनाव में अपने दम पर तीन चौथाई सीट जीतकर तीसरी बार मुख्यमंत्री के पद की शपथ ली। इस जीत ने नरेन्द्र मोदी का कद काफी बड़ा कर दिया था जिसे नकार पाना NDA के शीर्ष नेताओ के लिए सम्भव नहीं था। 13 सितम्बर 2013 को गोवा में भाजपा कार्यकारणी समिति की  बैठक में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आगामी लोकसभा में उतरने की घोसणा कर दी। 

नरेन्द्र मोदी ने अपने लोकसभा चुनाव प्रचार का अभियान हरियाणा के रेवाड़ी से शुरू की। चुनाव प्रचार का नया दौर देश ने लोक सभा के चुनाव में देखा जहाँ बीजेपी ने चाय पर चर्चा, 3D तकनीक से प्रचार, सेल्फी विथ मोदी अभियान और भी कई तरह के चुनाव प्रचार ने लोगो के बीच भाजपा को काफी लोकप्रिय बना दिया। 

2014 लोकसभा परिणाम में NDA को भारी सफलता मिली। अकेले भाजपा को बहुमत के आकड़ो से अधिक यानि 282 सीट आई तथा NDA को कुल 332 सीटे इस लोकसभा में हासिल हुई। नरेन्द्र मोदी दो लोकसभा सीट वड़ोदरा और वाराणसी से जीत हासिल की। बाद में वड़ोदरा से इस्तीफा दे दिया। 


नरेन्द्र मोदी का प्रदानमंत्री का सफर 

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26 मई 2014 को भारत के 15वें प्रधानमंत्री के रूप में नरेन्द्र मोदी ने शपथ ली। अपने शपथ समारोह में ही नरेन्द्र मोदी ने अपनी कुसल राजनीति तथा विदेश नीति का परिचय देते हुए सभी सार्क देशों के राष्ट्राध्यक्षों को आमंत्रित किया। जिनमे सबसे प्रमुख पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को बुलाना था। 

नरेन्द्र मोदी सत्ता सँभालते ही एक्शन में आ गई, कई वर्षो से लंबित भ्रष्टाचार से सम्बंधित विशेष जाँच दल (SIT) की गठन की मंजूरी दे दी। नरेन्द्र मोदी की पहले कार्यकाल में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए कुछ खास फैसले -

  • SIT का गठन 
  • सातवीं वेतन आयोग की मंजूरी 
  • OROP (  वन रैंक वन पेंसन ) योजना की मंजूरी 
  • योजना आयोग की समाप्ति 
  • रेल बजट की समाप्ति की घोषणा 
  • रक्षा क्षेत्र में FDI की मंजूरी 
  • प्रधानमंत्री जन धन योजना 
  • उज्ज्वला योजना 
  • स्वच्छ भारत अभियान 
  • हर घर में शौचालय योजना 
  • प्रधानमंत्री आवास योजना 
  • स्मार्ट सिटी योजना 
  • Wi-Fi सिटी योजना 
  • डिजिटल इंडिया योजना 
  • मुद्रा योजन 


 ऐतिहासिक फैसले 

नोट बंदी 

नरेंद्र मोदी ने अपने पहले कार्यकाल में बहुत सारे ऐतिहासिक फैसले लिए, उन्ही फैसलों में से एक नोट बंदी का फैसला था। 8 नवंबर 2016 को मोदी सरकार ने 500 और 1000 रूपये के पुराने नोटों की मान्यता खत्म कर दी। यह फैसल मोदी सरकार का एक साहसिक फैसला माना जाता है। सरकार का दावा था की इससे भष्टाचार से लड़ने में काफी मदद मिलेगी। काले धन पर लगाम लगेगा। इस फैसले से भारत की आर्थिक व्यवस्था को काफी नुकसान उठाना पड़ा। एक अनुमान के मुताबिक लगभग 5 करोड़ लोग प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से अपनी नौकरी या व्यापार गवाँ चुके है   

GST

नरेन्द्र मोदी सरकार ने एक और ऐतिहासिक फैसले को लेते हुए 01 जुलाई 2017 को 'एक भारत एक टैक्स' का नारा देते हुए पुरे देश में GST लागु कर दी गई। सरकार का मानना था की यह पुरे देश के टैक्स सिस्टम को बदल कर रख देगा और इससे व्यापार करना आसान हो जायेगा। बाजार इस फ़ैसले से भारत की इकनोमिक में बूस्टर होगा। लेकिन सरकार का यह दाव भी उल्टा पर गया। इसका सबसे बड़ा कारण था कागजी कामो को काफी बढ़ा दिया गया।

हर व्यापारी को साल में 24 बार खरीद और बिक्री का हिसाब देना था। इसका सबसे बड़ा कारण है की भारत का बहुत बड़ा व्यापारी वर्ग असंगठित क्षेत्र से आते है उन्हें कंप्यूटर या डिजिटललिएज़शन की समझ उतनी नहीं है। सरकार सबसे पहले व्यापारिओं को जागरूकता फ़ैलाने से पहले ही लागु कर दी। इसलिए सरकार को अपने नियम और टैक्स स्लैब को बार-बार बदलनी पड़ी। कई व्यापारिओं को gst की गणित को समझने में ही कई साल लग गए।

नोटबंदी और GST दो ऐतिहासिक फैसलों ने भारत के इकनोमिक को काफी पीछे धकेल दिया। यह फैसला कहीं से गलत नहीं था लेकिन भारत का व्यापारी वर्ग इसके लिए तैयार नहीं था। बिना तैयारी के इन फैसलों को देश में लागु कर दिया गया। जिसका खामियाजा भारत का इकनोमिक सेक्टर अभी तक भुगत रहा।

विदेश नीति 

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ब्रिक्स देशों के प्रमुख के साथ नरेंद्र मोदी 
नरेंद्र मोदी ने सत्ता सँभालते ही विदेशों से भारत के सम्बन्ध सुधारने में लग गए, इसका सबसे बड़ा उदहारण था अपने शपथग्रहण समारोह में सार्क देशों के प्रतिनिधि को आमंत्रित करना। नरेन्द्र मोदी अपने पहले कार्यकाल में काफी देशों का दौरा किया जिसकी आलोचना विपक्षी पार्टिओ द्वारा खूब की गई। मोदी जानते थे की जो भारत वासी विदेशों में बसे हुए है वो भारत की बाह्य तागत है उन्हें भारत के प्रति जिम्मेदारिओं का एहसास कराना है। अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई देशो के दौरे पर नरेंद्र मोदी ने लाखों भारतवंशी को सम्बोधित किया। उन्हें भारत में इन्वेस्टमेंट के लिए प्रोत्साहित किया।    
Narendra Modi with world leader relation
महाशक्ति देशों के प्रमुख के साथ नरेंद्र मोदी 
अमेरीक, रूस, चीन, ब्रिटेन तथा खाड़ी देशों के प्रमुख के साथ मोदी सरकार में रिश्ते काफी बेहतर हुए है। भारत सरकार के कई अहम् फैसलों पर ये सारे देश भारत के साथ अंतरास्ट्रीय मंचो पर साथ खड़े दिखे है। यही कारण है की भारत अब विश्व पटल पर महाशक्ति के रूप में उभर रहा है। 


पाकिस्तान के साथ सम्बन्ध   


मोदी ने सत्ता सँभालते ही पाकिस्तान से सम्बन्ध सुधारने की कोशिश शुरू कर दी। उन्होंने अपने शपथग्रहण में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री नवाज शरीफ को आमंत्रित किया था। उसके बाद उन्होंने कई बार अंतरराष्ट्रीय मंच पर उनसे मुलाकात की। 2015 में एक बार किसी योजना के ही नवाज शरीफ के रिश्तेदार के शादी में शरीक होने पहुँच गए। लेकिन पाकिस्तान की तरफ से ऐसी कोई पहल नहीं हुई। 

बालाकोट और उरी में सैनिकों पर हमला हो गया जिसमे कई भारतीय जवान शहीद हो गए। जिसके जवाब में भारत सरकार ने पाकिस्तानी आतंकी अड्डों पर करवाई किये। जिसमे दुनिया ने नरेंद्र मोदी की तागत को देखा जिसमे पाकिस्तान में घुस कर उनपे हमला किया तथा वहां आतंकवादी को न सिर्फ मारा बल्कि कार्यवाही को स्वीकारा भी। भारत-पाकिस्तान सीमा रेखा पर हमेशा सीज़ फायर का उलंखन होते रहते थे लेकिन भारत उनपे जवाबी करवाई नहीं करती थी। नरेंद्र मोदी ने सत्ता सँभालते ही सैनिको को छूट दिया की वो जवाबी करवाई करें। 


नरेंद्र मोदी का प्रधानमंत्री के रूप में दूसरा कार्यकाल  

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नरेन्द्र मोदी दूसरे कार्यकाल में शपथ लेते हुए 
नरेंद्र मोदी ने आगामी लोक सभा में बड़ी भारी बहुमत से जीत कर दूसरी बार सत्ता संभाली। इस कार्यकाल में नरेन्द्र मोदी के सामने कई बड़ी चुनौती थी। सबसे बड़ी चुनौती भारत के अर्थव्यस्था को संभालना तथा एक बड़ी संख्या में युवा जो बेरोज़गार है उन्हें रोजगार देना। नरेन्द्र मोदी के लगभग एक वर्ष के शासनकाल में तो इसपे अभी तक कोई खास ध्यान नहीं दिया गया। एक वर्ष के कार्यकाल में मोदी सरकार ने कई बड़े फैसलों जो आजादी के वक्त से लटके हुए थे उन पर अपनी मोहर लगाई 

  • धारा 370 और आर्टिकल 35A को हटाना 
  • जम्मू-कश्मीर को केंद्र शासित राज्य बनाना 
  • ट्रिपल तलाक की समाप्ति 
  • राम मंदिर के लिए रास्ता प्रशस्त करना 
  • CAA लागु करना 

नरेन्द्र मोदी भारत के पहले प्रधानमंत्री है जो आजादी के बाद जन्मे है। नरेन्द्र मोदी की अगुआई में भारत ने अपनी शाख विदेशों में काफी हद तक मजबूत की है। आंतरिक सुरक्षा का मसला हो या आतंकवाद का इस सरकार ने हर जरुरी कदम उठाए है। नरेन्द्र मोदी के सामने अभी सबसे बड़ी चुनौती है आर्थिक मोर्चे पर देश को सुढृढ़ अवस्था में ले जाना। आशा करते है इन चार सालों में भारत वो मुकाम हासिल करेगा जिसका हक़दार वो सदियों से है। 

!! जय हिन्द !!

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